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Saturday, 26 August 2017

Spoken Words Cannot Be Taken Back / बोले हुए शब्द वापस नहीं आते

एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया.उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा.

संत ने किसान से कहा , "तुम खूब सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें शहर  के बीचो-बीच जाकर रख दो .” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया.

तब संत ने कहा, "अब जाओ और उन पंखों को इकठ्ठा कर के वापस ले आओ”

किसान वापस गया पर तब  तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे. और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा. तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है,तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते.

बोले हुए शब्द वापस नहीं आते - प्रेरणादायक कहानियां

↪️सत्य पथ↩️

Friday, 9 December 2016

ईश्वर पर अडिग विश्वास - एक हृदय स्पर्शक कहानी

_विश्वास_

     एक बार एक अत्यंत गरीब महिला जो ईश्वरीय शक्ति पर बेइंतिहा विश्वास करती थी। एक बार अत्यंत ही विकट स्थिति में आ गई। कई दिनों से खाने के लिए पुरे परिवार को नहीं मिला।
एक दिन उसने रेडियो के माध्यम से ईश्वर को अपना सन्देश भेजा कि वह उसकी मदद करे।
यह प्रसारण एक नास्तिक, घमण्डी और अहंकारी उद्योगपति ने सुना और उसने सोचा कि क्यों न इस महिला के साथ कुछ ऐसा मजाक किया जाये कि उसकी ईश्वर के प्रति आस्था डिग जाय।
उसने अपने सेक्रेटरी को कहा कि वह ढेर सारा खाना और महीने भर का राशन उसके घर पर देकर आ जाये और जब वह महिला पूछे किसने भेजा है तो कह देना कि "शैतान" ने भेजा है।
जैसे ही महिला के पास सामान पंहुचा पहले तो उसके परिवार ने तृप्त होकर भोजन किया। फिर वह सारा राशन अलमारी में रखने लगी।
जब महिला ने पूछा नहीं कि यह सब किसने भेजा है?  तो सेक्रेटरी से रहा नहीं गया और पूछा, आपको क्या जिज्ञासा नही होती कि यह सब किसने भेजा है।
उस महिला ने बेहतरीन जवाब दिया, मैं इतना क्यों सोंचू  या पूंछू मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है, मेरा भगवान जब आदेश देते है तो शैतानों को भी उस आदेश का पालन करना पड़ता है।
👏😊
Trust on God

Sunday, 27 November 2016

बेटी या लक्ष्मी? दिल को छू लेने वाली कहानी

_MUST READ_

इसे शांत चित्त से पढिए।
हर लड़की के लिए प्रेरक कहानी, और लड़कों के लिए अनुकरणीय शिक्षा....
कोई भी लड़की की सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है।
.
अशोक भाई ने घर में पैर रखा....‘अरी सुनती हो!'
आवाज सुनते ही अशोक भाई की पत्नी हाथ मेँ पानी का गिलास लेकर बाहर आयी और बोली-
"अपनी beti का रिश्ता आया है,
अच्छा भला इज्जतदार सुखी परिवार है,
लड़के का नाम युवराज है।
बैँक मे काम करता है।
बस beti हाँ कह दे तो सगाई कर देते हैं"
Beti उनकी एकमात्र लड़की थी..
घर में हमेशा आनंद का वातावरण रहता था।
कभी कभार अशोक भाई सिगरेट व पान मसाले के कारण उनकी पत्नी और beti के साथ कहा सुनी हो जाती लेकिन....

Friday, 8 July 2016

Value Of Priceless Life - Short Story

एक कहानी - जीवन का मूल्य

💎  एक राजा का जन्म दिन था । सुबह जब वह घूमने निकला तो उसने तय किया कि वह रास्ते में मिलने वाले सबसे पहले व्यक्ति को आज पूरी तरह से खुश व सन्तुष्ट करेगा ।

💎  उसे एक भिखारी मिला । भिखारी ने राजा सें भीख मांगी तो राजा ने भिखारी की तरफ एक तांबे का सिक्का उछाल दिया । सिक्का भिखारी के हाथ सें छूट कर नाली में जा गिरा । भिखारी नाली में हाथ डालकर तांबे का सिक्का ढूंढने लगा ।

💎  राजा ने उसे बुलाकर दूसरा तांबे का सिक्का दे दिया । भिखारी ने खुश होकर वह सिक्का अपनी जेब में रख लिया और वापिस जाकर नाली में गिरा सिक्का ढूंढने लगा ।

💎  राजा को लगा कि भिखारी बहुत गरीब है । उसने भिखारी को फिर बुलाया और चांदी का एक सिक्का दिया । भिखारी ने राजा की जय-जयकार करते हुये चांदी का सिक्का रख लिया और फिर नाली में तांबे वाला सिक्का ढूंढने लगा ।

💎  राजा ने उसे फिर बुलाया और अब भिखारी को एक सोने का सिक्का दिया । भिखारी खुशी से झूम उठा और वापिस भागकर अपना हाथ नाली की तरफ बढाने लगा ।

💎  राजा को बहुत बुरा लगा । उसे खुद से तय की गयी बात याद आ गयी कि "पहले मिलने वाले व्यक्ति को आज खुश एवं सन्तुष्ट करना है ।" उसने भिखारी को फिर से बुलाया और कहा कि मैं तुम्हें अपना आधा राज-पाट देता हूँ । अब तो खुश व सन्तुष्ट हो जाओ ।

💎  भिखारी बोला - "सरकार ! मैं तो खुश और संतुष्ट तभी हो सकूँगा, जब नाली में गिरा हुआ तांबे का सिक्का भी मुझे मिल जायेगा ।"

💎  हमारा हाल भी उस भिखारी जैसा ही है । हमें परमात्मा ने मानव रुपी अनमोल खजाना दिया है और हम उसे भूलकर संसार रुपी नाली में तांबे के सिक्के निकालने के लिए जीवन गंवाते जा रहे हैं । "इस अनमोल मानव जीवन का हम सही इस्तेमाल करें, हमारा जीवन धन्य हो जायेगा ।"
जितना हो सके ईश्वर का सुमिरन करें....!

Saturday, 2 July 2016

Preparation Of Last Journey - Inspirational Short Hindi Story

अंतिम सफर की तैयारी -
एक राज्य का क़ानून था कि वो एक साल बाद अपना राजा बदल लेते थे।
उस दिन जो भी सब से पहले शहर में आता था तो उसे राजा घोषित कर लेते थे,
और इससे पहले वाले राजा को एक बहुत ही ख़तरनाक और मीलों मॆं फैले जंगल के बीचों बीच छोड़कर आते जहां बेचारा अगर खूंखार जानवरो से किसी तरह अपने आप को बचा लेता तो भूख- प्यास से मर जाता ।
ना जाने कितने ही राजा ऐसे ही एक साल की राजगद्दी के बाद जंगल में जा कर मर गए ।
एक बार राज्य में एक नौजवान किसी दूसरे राज्य से आया और इस राज्य के कानून से अनजान था, तब सब लोगों ने आगे बढ़कर उसे बधाईयाँ दी और उसे बताया कि उसको इस राज्य का राजा चुन लिया गया है और उसे बड़े मान-शान के साथ राजमहल में ले गए ।
वो हैरान भी हुआ और बहुत ख़ुश भी । राजगद्दी पर बैठते ही उसने पूछा कि मुझ से पहले जो राजा था, वो कहाँ है? तो दरबारियों ने उसे इस राज्य का क़ानून बताया कि हर राजा को एक साल बाद जंगल में छोड़ दिया जाता है और नया राजा चुन लिया जाता है ।
ये बात सुनते ही वो एक बार तो परेशान हुआ लेकिन फिर उसने अपनी दिमाग का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मुझे उस जगह लेकर चलो जहाँ तुम अपने पहले के राजाओ को छोड़कर आते हो।
दरबारियों ने सिपाहियों को साथ लिया और नये नियुक्त राजा को वो जगह दिखाने जंगल में ले गए, राजा ने अच्छी तरह उस जगह को देख लिया और वापस आ गया....
अगले दिन उसने सबसे पहला आदेश ये दिया कि मेरे राजमहल से जंगल तक एक सड़क बनाई जाये और जंगल के बीचों बीच एक ख़ूबसूरत राजमहल बनाया जाये जहां पर हर तरह की सुविधा मौजूद हों और राजमहल के बाहर ख़ूबसूरत बाग़ बनाया जाएं।
राजा के आदेश का पालन किया गया, जंगल मे सड़क और राजमहल बनकर तैयार हो गया। एक साल के पूरे होते ही राजा ने दरबारियों से कहा कि आप अपने कानून का पालन करो और मुझे वहां छोड़ आओ जहां मुझ से पहले राजाओ को छोड़ के आते थे।
दरबारियों ने कहा कि महाराज आज से ये कानून ख़त्म हो गया क्योंकि हमें एक अक़लमंद राजा मिल गया है ,
वहाँ तो हम उन बेवक़ूफ राजाओ को छोड़कर आते थे जो एक साल की राजशाही के मज़े में बाक़ी की ज़िंदगी को भूल जाते और अपने लिए कोई बंदोबस्त ना करते थे,
लेकिन आप ने अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और आगे का बंदोबस्त कर लिया। हमें ऐसे ही होशियार राजा की ज़रूरत थी अब आप आराम से सारी ज़िंदगी हमारे राज्य पर राज करें ।
अब हम लोग भी यह सोचें कि कुछ दिन बाद हमें भी ये दुनिया वाले एक दिन ऐसी जगह छोड़कर आयेंगे....
जहां से कोई वापस नहीं आता तो क्यो ना हम भी वक्त रहते हुए नेक कर्म और ईश्वर की बदंगी करके अपने अगले सफर की तैयारी कर लें....
या बेवक़ूफ़ बन कर कुछ दिनों की ज़िंदगी के मज़ों में लगे रहें । और ये जन्म बर्बाद कर लें....

Thursday, 30 June 2016

Do Good And Get Good Rewards Hindi Story

एक बहुत सुंदर कथा
.
एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी..।

वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था..।

एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा..।"

दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा..

वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।"

वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी की- "कितना अजीब व्यक्ति है, एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है, और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है, मतलब क्या है इसका.।"

एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली- "मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी.।"

और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में ज़हर मिला दिया जो वो रोज़ उसके लिए बनाती थी, और जैसे ही उसने रोटी को को खिड़की पर रखने कि कोशिश की, कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और रुक गये और वह बोली- "हे भगवन, मैं ये क्या करने जा रही थी.?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे कि आँच में जला दिया..। एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी..।

हर रोज़ कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी ले के: "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा" बड़बड़ाता हुआ चला गया..।

इस बात से बिलकुल बेख़बर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल रहा है..।

हर रोज़ जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर वापसी के लिए प्रार्थना करती थी, जो कि अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था..। महीनों से उसकी कोई ख़बर नहीं थी..।

ठीक उसी शाम को उसके दरवाज़े पर एक दस्तक होती है.. वह दरवाजा खोलती है और भोंचक्की रह जाती है.. अपने बेटे को अपने सामने खड़ा देखती है..।

वह पतला और दुबला हो गया था.. उसके कपडे फटे हुए थे और वह भूखा भी था, भूख से वह कमज़ोर हो गया था..।

जैसे ही उसने अपनी माँ को देखा, उसने कहा- "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहाँ हूँ.. आज जब मैं घर से एक मील दूर था, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर गया.. मैं मर गया होता..।

लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुज़र रहा था.. उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.. भूख के मरे मेरे प्राण निकल रहे थे.. मैंने उससे खाने को कुछ माँगा.. उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि- "मैं हर रोज़ यही खाता हूँ, लेकिन आज मुझसे ज़्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है.. सो ये लो और अपनी भूख को तृप्त करो.।"

जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी, माँ का चेहरा पीला पड़ गया और अपने आप को सँभालने के लिए उसने दरवाज़े का सहारा लीया..।

उसके मस्तिष्क में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था, अगर उसने वह रोटी आग में जला के नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत..?

और इसके बाद उसे उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चूका था- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।।

               " निष्कर्ष "
           ==========
हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको, फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी सराहना या प्रशंसा हो या ना हो..।
            ==========

अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो तो इसे दूसरों के साथ ज़रूर शेयर करें..

मैं आपसे दावे के साथ कह सकता हूँ कि ये बहुत से लोगों के जीवन को छुएगी व बदलेगी.।

A Potter's Views About Making A Smoking Pipe In Hindi

   
    एक कुम्हार माटी से चिलम बनाने जा रहा था.... उसने चिलम का आकार दिया.... थोड़ी देर में उसने चिलम को बिगाड़ दिया....

माटी ने पूछा - अरे कुम्हार, तुमने चिलम अच्छी बनाई फिर बिगाड़
क्यों दिया ????

कुम्हार ने कहा कि -  अरी माटी, पहले मैं चिलम बनाने की सोच रहा था, किन्तु मेरी मति (दिमाग) बदली और अब मैं सुराही बनाऊंगा....

ये सुनकर माटी बोली - रे कुम्हार.... मुझे खुशी है, तेरी तो सिर्फ मति ही बदली, मेरी तो जिंदगी ही बदल गयी....😇

चिलम बनती तो स्वयं भी जलती और दूसरों को भी जलाती, अब सुराही बनूँगी तो स्वयं भी शीतल रहूंगी और दूसरों को भी शीतल रखूंगी....😌

यदि जीवन में हम सभी सही फैसला लें तो हम स्वयं भी खुश रहेंगे एवं दूसरों को भी खुशियाँ दे सकेंगे....😊😌

✍  वक्त की एक आदत बहुत
                 अच्छी है,
      जैसा भी हो,  गुजर जाता है!
            "कामयाब इंसान खुश
                  रहे ना रहे,
      खुश रहने वाला इंसान कामयाब
              जरूर हो जाता है!

Tuesday, 28 June 2016

Inspiring Philosophy Of Panwala In Hindi

एक पान वाला था। जब भी पान खाने जाओ ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता। कई बार उसे कहा की भाई देर हो जाती है जल्दी पान लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नही होती।

एक दिन अचानक कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई। तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैनें सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी देख ही लेते हैं।

मैंने एक सवाल उछाल दिया। मेरा सवाल था कि आदमी मेहनत से आगे बढ़ता है या भाग्य से? और उसके जवाब से मेरे दिमाग़ के सारे जाले ही साफ़ हो गए।

कहने लगा, आपका किसी बैंक में लाकर तो होगा, उसकी चाभियाँ ही इस सवाल का जवाब है। हर लाकर की दो चाभियाँ होती हैं। एक आप के पास होती है और एक मैनेजर के पास। आप के पास जो चाभी है वह है परिश्रम और मैनेजर के पास वाली भाग्य। जब तक दोनों नहीं लगतीं ताला नही खुल सकता।

आप कर्मयोगी पुरुष हैं ओर मैनेजर भगवान। अाप को अपनी चाभी भी लगाते रहना चाहिये। पता नहीं ऊपर वाला कब अपनी चाभी लगा दे। कहीं ऐसा न हो की भगवान अपनी भाग्यवाली चाभी लगा रहा हो और हम परिश्रम वाली चाभी न लगा पायें और ताला खुलने से रह जाये।🌹🌹🌹🌹
🙏🙏🙏🙏🙏

Monday, 27 June 2016

छूकर.... मेरे मन को.... A Nice Heart Touching Short Story In Hindi

छूकर....मेरे मन को....
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एक शहर में एक प्रसिद्ध बनारसी विद्वान् "ज्योतिषी" का आगमन हुआ..!!
माना जाता है कि उनकी वाणी में सरस्वती विराजमान है और वे जो भी बताते है वह 100% सच ही होता है।
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501/- रुपये देते हुए "शर्मा जी" ने अपना दाहिना हाथ आगे बढ़ाते हुए ज्योतिषी को कहा.. "महाराज,
मेरी मृत्यु कब, कहॉ और किन परिस्थितियों में होगी?"
.
ज्योतिषी ने शर्मा जी की हस्त रेखाऐं देखीं,
चेहरे और माथे को अपलक निहारते रहे।
स्लेट पर कुछ अंक लिख कर जोड़ते–घटाते रहे। बहुत देर बाद वे गंभीर स्वर में बोले..
"शर्मा जी, आपकी भाग्य रेखाएँ कहती है कि जितनी आयु आपके पिता को प्राप्त होगी उतनी ही आयु आप भी पाएँगे।
जिन परिस्थितियों में और जहाँ आपके पिता की मृत्यु होगी, उसी स्थान पर और उसी तरह, आपकी भी मृत्यु होगी।"
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यह सुन कर "शर्मा जी" भयभीत हो उठे और चल पड़े....
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एक घण्टे बाद ...
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"शर्मा जी" वृद्धाश्रम से अपने वृद्ध पिता को साथ लेकर घर लौट रहे थे..!!

Friday, 17 June 2016

भाग्य से ज्यादा और समय से पहले - कहानी

Inspiring Short Story About Before Time And More Than Luck

    एक सेठ जी थे, जिनके पास काफी दौलत थी। सेठ जी ने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की थी। परन्तु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया। जिससे सब धन समाप्त हो गया।

बेटी की यह हालत देखकर सेठानी जी रोज सेठ जी से कहती कि आप दुनिया की मदद करते हो, मगर अपनी बेटी परेशानी में होते हुए उसकी मदद क्यों नहीं करते हो ?

सेठ जी कहते कि-
"जब उनका भाग्य उदय होगा तो अपने आप सब मदद करने को तैयार हो जायेंगे...."

एक दिन सेठ जी घर से बाहर गये थे कि, तभी उनका दामाद घर आ गया।
सास ने दामाद का आदर-सत्कार किया और बेटी की मदद करने का विचार उसके मन में आया कि क्यों न मोतीचूर के लड्डूओं में अर्शफिया रख दी जाये....

यह सोचकर सास ने लड्डूओ के बीच में अर्शफिया दबा कर रख दी और दामाद को टीका लगा कर विदा करते समय पांच किलों शुद्ध देशी घी के लड्डू, जिनमें अर्शफिया थी, दिये....

दामाद लड्डू लेकर घर से चला, दामाद ने सोचा कि इतना वजन कौन लेकर जाये क्यों न यहीं मिठाई की दुकान पर बेच दिये जायें और दामाद ने वह लड्डुयों का पैकेट मिठाई वाले को बेच दिया और पैसे जेब में डालकर चला गया।

उधर सेठ जी बाहर से आये तो उन्होंने सोचा घर के लिये मिठाई की दुकान से मोतीचूर के लड्डू लेता चलू और सेठ जी ने दुकानदार से लड्डू मांगे.... मिठाई वाले ने वही लड्डू का पैकेट सेठ जी को वापिस बेच दिया।

सेठ जी लड्डू लेकर घर आये.... सेठानी ने जब लड्डूओ का वही पैकेट देखा तो सेठानी ने लड्डू फोड़कर देखे, अर्शफिया देख कर अपना माथा पीट लिया।

सेठानी ने सेठ जी को दामाद के आने से लेकर जाने तक और लड्डुओं में अर्शफिया छिपाने की बात कह डाली....

सेठ जी बोले कि भाग्यवान मैंनें पहले ही समझाया था कि अभी उनका भाग्य नहीं जागा....

देखा मोहरें ना तो दामाद के भाग्य में थी और न ही मिठाई वाले के भाग्य में....

इसलिये कहते हैं कि भाग्य से
ज्यादा
और....
समय
से पहले न किसी को कुछ मिला है और न मीलेगा ! ईसी लिये ईशवर जितना दे उसी मै संतोष करो....

झूला जितना पीछे जाता है, उतना ही आगे आता है।एकदम बराबर।
सुख और दुख दोनों ही जीवन में बराबर आते हैं।
जिंदगी का झूला पीछे जाए, तो डरो मत, वह आगे भी आएगा।

बहुत ही खूबसूरत लाईनें-
किसी की मजबूरियाँ पे न हँसिये,
कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नहीं लाता....!
डरिये वक़्त की मार से, बुरा वक़्त किसी को बताकर नही आता....!

अकल कितनी भी तेज ह़ो,नसीब के बिना नही जीत सकती....!
बीरबल अकलमंद होने के बावजूद,कभी बादशाह नही बन सका....!

"ना तुम अपने आप को गले लगा सकते हो, ना ही तुम अपने कंधे पर सर रखकर रो सकते हो एक दूसरे के लिये जीने का नाम ही जिंदगी है!"

इसलिये वक़्त उन्हें दो जो तुम्हे चाहते हों दिल से!

रिश्ते पैसो के मोहताज़ नहीं होते क्योकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते पर जीवन अमीर जरूर बना देते हैं!

               👆🏼जरूर पढ़े👆🏼

Thursday, 9 June 2016

Reason Behind Naming Ubuntu Operating System In Hindi

उबुन्टु ( UBUNTU ) एक सुंदर कथा....!

उबुन्टु ऑपरेटिंग सिस्टम
( Ubuntu Operating System )

जानते हैं, किससे प्रेरित है इस ऑपरेटिंग सिस्टम का नाम ?
👇
कुछ आफ्रिकन आदीवासी बच्चों को एक मनोविज्ञानी ने एक खेल खेलने को कहा।

उसने एक टोकरी में मिठाइयाँ और कैंडीज एक वृक्ष के पास रख दिए।

बच्चों को वृक्ष से 100 मीटर दूर खड़े कर दिया।

फिर उसने कहा कि, जो बच्चा सबसे पहले पहुँचेगा उसे टोकरी के सारे स्वीट्स मिलेंगे।

जैसे ही उसने, रेड़ी स्टेडी गो कहा....

तो जानते हैं उन छोटे बच्चों ने क्या किया ?

सभी ने एक दुसरे का हाँथ पकड़ा और एक साथ वृक्ष की ओर दौड़ गए, पास जाकर उन्होंने सारी मिठाइयाँ और कैंडीज आपस में बराबर बाँट लिए और मजे ले लेकर खाने लगे।

जब मनोविज्ञानी ने पूछा कि, उन लोगों ने ऐंसा क्यों किया ?
 
तो उन्होंने कहा- "उबुन्टु ( Ubuntu )"

जिसका मतलब है,

"कोई एक व्यक्ति कैसे खुश रह सकता है जब, बाकी दूसरे सभी दुखी हों ?"

उबुन्टु ( Ubuntu ) का उनकी भाषा में मतलब है,

"मैं हूँ क्योंकि, हम हैं!"

सभी पीढ़ियों के लिए एक सुन्दर सन्देश,
आइए इस के साथ सब ओर जहाँ भी जाएँ, खुशियाँ बिखेरें,

आइए उबुन्टु ( Ubuntu ) वाली जिंदगी जिएँ....

" मैं हूँ क्योंकि, हम हैं..!! "
I am, because we are.

साथ सदैव बना रहै....

Tuesday, 15 December 2015

Dara Singh Vs King Kong Historical Wrestling / दारा सिंह और किंग कोंग की ऐतिहासिक कुश्ती

     बात 1962 की है, जब Dara Singh के कदम रांची की सरजमीं पर पड़े थे। सिडनी के King Kong ने दारा सिंह को कुश्ती लडऩे की चुनौती दी थी। हिन्दुतान के दारा सिंह height 6' 2" weight 130 kg ने उस 208 किलो के किंग कोंग height 6' 4" की चुनौती को स्वीकार कर लिया था.... अब्दुर बारी पार्क में कुश्ती होना तय हुआ और ये कुश्ती होने से पहले ही सनसनी छा गयी।

Dara Singh And King Kong
Dara Singh And King Kong
     नवंबर 1962 में दुनियाभर के पहलवान रांची में जुटे थे। उस वक्त सिटी में दारा सिंह की जिन-जिन पहलवानों के साथ कुश्ती हुई, सबमें उन्हें जीत मिली थी। पर, तब स्पेक्टेटर्स को उस पल का बेसब्री से इंतजार था, जब दारा सिंह और किंग कांग की भिड़ंत होती। थोड़े इंतजार के बाद दारा सिंह और किंग कांग अखाड़े पर उतरे। मुकाबले में 200 केजी के किंग कांग के सामने दारा सिंह तो बच्चे लग रहे थे, पर उनका आत्मविश्वास किंग कांग पर भारी पड़ा।

Monday, 7 December 2015

Poverty Of Sole Is Real Poverty - Nice Short Story

एक बार एक गरीब आदमी ने भगवान् बुद्ध से पूछा "मैं इतना क्यों गरीब हूँ?",

बुद्ध ने कहा "तुम गरीब हो क्योंकि तुमने देना नहीं सीखा।"

गरीब आदमी ने कहा "परन्तु मेरे पास तो देने के लिए कुछ भी नहीं है?"

बुद्ध ने कहा, "तुम्हारा चेहरा: एक मुस्कान दे सकता है। तुम्हारा मुँह: किसी की प्रशंसा कर सकता है या दूसरों को सुकून पहुंचाने के लिए दो मीठे बोल बोल सकता है, तुम्हारे हाथ: किसी ज़रूरतमंद की सहायता कर सकते हैं।
और तुम कहते हो तुम्हारे पास देने के लिए कुछ भी नहीं है"?

तो दोस्तों! वास्तव में हम में से कोई भी गरीब नहीं हैं, आत्मा की गरीबी ही वास्तविक गरीबी है। पाने का हक उसी को है जो देना जानता है।

Sunday, 6 December 2015

Inspiring Short Story In Hindi

Two Brothers Inspiring Short Story In Hindi / दो भाइयों की प्रेरणादायक कहानी-

Two Brothers Inspiring Short Story In Hindi
Two Brothers Inspiring Short Story In Hindi

Saturday, 5 December 2015

Khushiyan Bikhri Padi Hain - Bas Aapko Unhein Chunna Hai

मिठास

             〰〰〰〰
        चाय का कप लेकर आप
        खिड़की के पास बैठे हों
    और बाहर के सुंदर नज़ारे का
आनंद लेते हुए चाय की चुस्की लेते हैं
.....अरे चीनी डालना तो भूल ही गये....
  और तभी फिर से किचन मेँ जाकर
   चीनी डालने का आलस आ गया....
    आज फीकी चाय को जैसे तैसे
      पी गए,कप खाली कर दिया

Thursday, 3 December 2015

ज़िन्दगी की करवटे कभी कभी भूल सुधार का मौका नहीं देती - दिल को छू लेने वाली कहानी

एक प्रेमी-युगल शादी से पहले काफी हँसी-मजाक और नोक-झोंक किया करते थे।
शादी के बाद उनमें छोटी छोटी बातो पे झगड़े होने लगे।
.
एक दिन उनकी शादी कि सालगिरह थी
पर बीबी ने कुछ नहीं बोला वो पति का रेस्पॉन्स देखना चाहती थी।
.
सुबह पति जल्दी उठा और घर से बाहर निकल गया।
बीबी रूआंसी हो गई।
.
दो घण्टे बाद डोरबेल बजी वो दौड़ती हुई गई जाकर दरवाजा खोला।

Monday, 30 November 2015

बिरजू और उसकी ग़रीबी - प्रेरणादायक कहानी

बिरजू थका-हारा अपनी झोपड़ी में लौटा। उसका
उतरा हुआ मुख देखकर उसकी पत्नी ने पूछा आज भी
आपको काम नही मिला? उसने कुछ नहीं कहा।
झोंपड़ी में अंधियारा छाया था।
बिरजू की पत्नी ने दीपक जलाते हुए कहा, जरा-सा तेल है, पता नहीं
यह दीपक भी कितनी देर जलेगा? गरीब बिरजू के दुर्दिन चल रहे थे। एक
फैक्टरी में काम करते उसने अपना एक हाथ खो दिया था। अपाहिज
बिरजू को अब काम के लाले पड़ गए थे। पत्नी भी उसकी उपेक्षा करने
लगी थी। तभी पत्नी ने उसे थाली परोसी। दो सूखी रोटियां थाली
में रखी थीं। बिरजू को लगा कि बच्चों ने शायद खाना नहीं खाया है।
उसने झिझकते हुए पत्नी से पूछा, बच्चों ने खाना खा लिया?

Monday, 23 November 2015

एक विधायक ऐसा भी - जिसने जीत रखा है सबका दिल

एक विधायक ऐसा भी


     आजकल जहाँ विधायक और एमपी अपनी चमक धमक और रोबदार शान ओ शोकत के लिए पहचाने जाते हैं वहीँ कुछ ऐसे जनप्रतिनिधि भी हैं जिन्होंने अपनी सादगी और ईमानदारी से जनता का दिल जीत रखा है। ऐसे नेताओ को देखकर लगता है कि यदि सभी में ऐसी लगन और समर्पण आ जाये तो हमारा ये देश फिर से सोने की चिड़िया बन सकता है। 
Alambadi MLA / अलामबदी विधायक
Alambadi MLA / अलामबदी विधायक
     सादा कुर्ता-पायजामा, पुरानी अम्बेस्डर कार जिसका पेंट जगह-जगह से उखड़ा हुआ, हाथ में एक सादा और....

Never Loose Faith In God, He Will Lookafter You Forever

ये मैसेज पूरा पढ़े, और अच्छा लगे तो सबको भेजें।

     एक भक्त था वह ईश्वर को बहुत मानता था, बड़े प्रेम और भाव से उनकी भक्ती किया करता था । एक दिन ईश्वर से कहने लगा –
"मैं आपकी इतनी भक्ति करता हूँ पर आज तक मुझे आपकी अनुभूति नहीं हुई। मैं चाहता हूँ कि आप भले ही मुझे दर्शन ना दे पर ऐसा कुछ कीजिये की मुझे ये अनुभव हो की आप हो।"

     ईश्वर ने कहा ठीक है,  तुम रोज सुबह समुद्र के किनारे सैर पर जाते हो,  जब तुम रेत पर चलोगे तो तुम्हे दो पैरो की जगह चार पैर दिखाई देंगे। दो तुम्हारे पैर होंगे और दो पैरो के निशान मेरे होंगे । इस तरह तुम्हे मेरी  अनुभूति होगी।

     अगले दिन वह सैर पर गया, जब वह रेत पर चलने लगा तो उसे अपने पैरों के साथ-साथ दो पैर और भी दिखाई दिये वह बड़ा खुश हुआ। अब रोज ऐसा होने लगा।

     एक बार उसे व्यापार में घाटा हुआ सब कुछ चला गया, वह रोड पर आ गया उसके अपनो ने उसका साथ छोड़

Saturday, 3 October 2015

Effact of Company in Hindi

नमन बन्धुबर
आपका हर पल मंगलमय हो
" संगति का असर "
एक बार एक राजा शिकार के उद्देश्य से अपने काफिले के साथ किसी जंगल से गुजर रहा था | दूर दूर तक शिकार नजर नहीं आ रहा था, वे धीरे धीरे घनघोर जंगल में प्रवेश करते गए | अभी कुछ ही दूर गए थे की उन्हें कुछ डाकुओं के छिपने की जगह दिखाई दी | जैसे ही वे उसके पास पहुचें कि पास के पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – ,
"पकड़ो पकड़ो एक राजा आ रहा है इसके पास बहुत सारा सामान है लूटो लूटो जल्दी आओ जल्दी आओ |”
तोते की आवाज सुनकर सभी डाकू राजा की और दौड़ पड़े | डाकुओ को अपनी और आते देख कर राजा और उसके सैनिक दौड़ कर भाग खड़े हुए | भागते-भागते कोसो दूर निकल गए | सामने एक बड़ा सा पेड़ दिखाई दिया | कुछ देर सुस्ताने के लिए उस पेड़ के पास चले गए , जैसे ही पेड़ के पास पहुचे कि उस पेड़ पर बैठा तोता बोल पड़ा – आओ राजन हमारे साधू महात्मा की कुटी में आपका स्वागत है | अन्दर आइये पानी पीजिये और विश्राम कर लीजिये | तोते की इस बात को सुनकर राजा हैरत में पड़ गया , और सोचने लगा की एक ही जाति के दो प्राणियों का व्यवहार इतना अलग-अलग कैसे हो सकता है | राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था | वह तोते की बात मानकर अन्दर साधू की कुटिया की ओर चला गया, साधू महात्मा को प्रणाम कर उनके समीप बैठ गया और अपनी सारी कहानी सुनाई | और फिर धीरे से पूछा, “ऋषिवर इन दोनों तोतों के व्यवहार में आखिर इतना अंतर क्यों है |”
साधू महात्मा धैर्य से सारी बातें सुनी और बोले ” ये कुछ नहीं राजन बस संगति का असर है | डाकुओं के साथ रहकर तोता भी डाकुओं की तरह व्यवहार करने लगा है और उनकी ही भाषा बोलने लगा है | अर्थात जो जिस वातावरण में रहता है वह वैसा ही बन जाता है कहने का तात्पर्य यह है कि मूर्ख भी विद्वानों के साथ रहकर विद्वान बन जाता है और अगर विद्वान भी मूर्खों के संगत में रहता है तो उसके अन्दर भी मूर्खता आ जाती है | इस लिये हमें संगती सोच समझ कर करनी चाहिए |
राम बंसल