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Saturday, 15 September 2018

Brian Bodzone Reason Of Corruption In India In Hindi

दुनिया के भ्रष्टाचार मुक्त देशों में शीर्ष पर गिने जाने वाले न्यूजीलैंण्ड के एक लेखक ब्रायन ने भारत में व्यापक रूप से फैंलें भष्टाचार पर एक लेख लिखा है। ये लेख सोशल मीडि़या पर काफी वायरल हो रहा है। लेख की लोकप्रियता और प्रभाव को देखते हुए विनोद कुमार जी ने इसे हिन्दी भाषीय पाठ़कों के लिए अनुवादित किया है। –

  *न्यूजीलैंड से एक बेहद तल्ख आर्टिकिल।*

*भारतीय लोग  होब्स विचारधारा वाले है (सिर्फ अनियंत्रित असभ्य स्वार्थ की संस्कृति वाले)*

भारत मे भ्रष्टाचार का एक कल्चरल पहलू है। भारतीय भ्रष्टाचार मे बिलकुल असहज नही होते, भ्रष्टाचार यहाँ बेहद व्यापक है। भारतीय भ्रष्ट व्यक्ति का विरोध करने के बजाय उसे सहन करते है। कोई भी नस्ल इतनी जन्मजात भ्रष्ट नही होती

*ये जानने के लिये कि भारतीय इतने भ्रष्ट क्यो होते हैं उनके जीवनपद्धति और परम्पराये देखिये।*

भारत मे धर्म लेनेदेन वाले व्यवसाय जैसा है। भारतीय लोग भगवान को भी पैसा देते हैं इस उम्मीद मे कि वो बदले मे दूसरे के तुलना मे इन्हे वरीयता देकर फल देंगे। ये तर्क इस बात को दिमाग मे बिठाते हैं कि अयोग्य लोग को इच्छित चीज पाने के लिये कुछ देना पडता है। मंदिर चहारदीवारी के बाहर हम इसी लेनदेन को भ्रष्टाचार कहते हैं। धनी भारतीय कैश के बजाय स्वर्ण और अन्य आभूषण आदि देता है। वो अपने गिफ्ट गरीब को नही देता, भगवान को देता है। वो सोचता है कि किसी जरूरतमंद को देने से धन बरबाद होता है।

*जून 2009 मे द हिंदू ने कर्नाटक मंत्री जी जनार्दन रेड्डी द्वारा स्वर्ण और हीरो के 45 करोड मूल्य के आभूषण तिरुपति को चढाने की खबर छापी थी। भारत के मंदिर इतना ज्यादा धन प्राप्त कर लेते हैं कि वो ये भी नही जानते कि इसका करे क्या। अरबो की सम्पत्ति मंदिरो मे व्यर्थ पडी है।*

*जब यूरोपियन इंडिया आये तो उन्होने यहाँ स्कूल बनवाये। जब भारतीय यूरोप और अमेरिका जाते हैं तो वो वहाँ मंदिर बनाते हैं।*

*भारतीयो को लगता है कि अगर भगवान कुछ देने के लिये धन चाहते हैं तो फिर वही काम करने मे कुछ कुछ गलत नही है। इसीलिये भारतीय इतनी आसानी से भ्रष्ट बन जाते हैं।*

*भारतीय कल्चर इसीलिये इस तरह के व्यवहार को आसानी से आत्मसात कर लेती है, क्योंकि*

1 नैतिक तौर पर इसमे कोई नैतिक दाग नही आता। एक अति भ्रष्ट नेता जयललिता दुबारा सत्ता मे आ जाती है, जो आप पश्चिमी देशो मे सोच भी नही सकते ।

2 भारतीयो की भ्रष्टाचार के प्रति संशयात्मक स्थिति इतिहास मे स्पष्ट है। भारतीय इतिहास बताता है कि कई शहर और राजधानियो को रक्षको को गेट खोलने के लिये और कमांडरो को सरेंडर करने के लिये घूस देकर जीता गया। ये सिर्फ भारत मे है

भारतीयो के भ्रष्ट चरित्र का परिणाम है कि भारतीय उपमहाद्वीप मे बेहद सीमित युद्ध हुये। ये चकित करने वाला है कि भारतीयो ने प्राचीन यूनान और माडर्न यूरोप की तुलना मे कितने कम युद्ध लडे। नादिरशाह का तुर्को से युद्ध तो बेहद तीव्र और अंतिम सांस तक लडा गया था। भारत मे तो युद्ध की जरूरत ही नही थी, घूस देना ही ही सेना को रास्ते से हटाने के लिये काफी था।  कोई भी आक्रमणकारी जो पैसे खर्च करना चाहे भारतीय राजा को, चाहे उसके सेना मे लाखो सैनिक हो, हटा सकता था।

प्लासी के युद्ध मे भी भारतीय सैनिको ने मुश्किल से कोई मुकाबला किया। क्लाइव ने मीर जाफर को पैसे दिये और पूरी बंगाल सेना 3000 मे सिमट गई। भारतीय किलो को जीतने मे हमेशा पैसो के लेनदेन का प्रयोग हुआ। गोलकुंडा का किला 1687 मे पीछे का गुप्त द्वार खुलवाकर जीता गया। मुगलो ने मराठो और राजपूतो को मूलतः रिश्वत से जीता श्रीनगर के राजा ने दारा के पुत्र सुलेमान को औरंगजेब को पैसे के बदले सौंप दिया। ऐसे कई केसेज हैं जहाँ भारतीयो ने सिर्फ रिश्वत के लिये बडे पैमाने पर गद्दारी की।

सवाल है कि भारतीयो मे सौदेबाजी का ऐसा कल्चर क्यो है जबकि जहाँ तमाम सभ्य देशो मे ये  सौदेबाजी का कल्चर नही है

3- *भारतीय इस सिद्धांत मे विश्वास नही करते कि यदि वो सब नैतिक रूप से व्यवहार करेंगे तो सभी तरक्की करेंगे क्योंकि उनका “विश्वास/धर्म” ये शिक्षा नही देता।  उनका कास्ट सिस्टम उन्हे बांटता है। वो ये हरगिज नही मानते कि हर इंसान समान है। इसकी वजह से वो आपस मे बंटे और दूसरे धर्मो मे भी गये। कई हिंदुओ ने अपना अलग धर्म चलाया जैसे सिख, जैन बुद्ध, और कई लोग इसाई और इस्लाम अपनाये। परिणामतः भारतीय एक दूसरे पर विश्वास नही करते।  भारत मे कोई भारतीय नही है, वो हिंदू ईसाई मुस्लिम आदि हैं। भारतीय भूल चुके हैं कि 1400 साल पहले वो एक ही धर्म के थे। इस बंटवारे ने एक बीमार कल्चर को जन्म दिया। ये असमानता एक भ्रष्ट समाज मे परिणित हुई, जिसमे हर भारतीय दूसरे भारतीय के विरुद्ध है, सिवाय भगवान के जो उनके विश्वास मे खुद रिश्वतखोर है।*

लेखक-ब्रायन,
गाडजोन न्यूजीलैंड

( समाज की बंद आँखों को खोलने के लिए इस मैसेज  को जितने लोगो तक भेज सकते हैं भेजने का कष्ट करें ।)
धन्यवाद 🙏🙏

Friday, 26 January 2018

Words Meaning Of National Anthem In Hindi

जानिए क्या है हमारे राष्ट्रगान जन गण मन का मतलब....

शब्द             अंग्रेजी              हिंदी

जन=            People=             लोग
गण=             Group=             समूह
मन=              Mind =           दिमाग
अधिनायक=     Leader=             नेता
जय हे=           Victory=           जीत
भारत=           India=               भारत
भाग्य=            Destiny=      किस्मत
विधाता=     Disposer=    ऊपरवाला
पंजाब=          Punjab=          पंजाब
सिंधु=            Sindhu =           सिंधु
गुजरात=       Gujarat=         गुजरात
मराठा=        Maratha=       मराठा (महाराष्ट्र)
द्रविण=          South=             दक्षिण
उत्कल=         Orissa=          उड़िसा
बंगा=            Bengal=           बंगाल
विंध्य=      Vindhyas=    विन्धयाचल
हिमाचल=      Himalay=     हिमालय
यमुना=        Yamuna =          यमुना
गंगा=            Ganges =           गंगा
उच्छलय=       Moving=     गतिमान
जलधि=        Ocean =           समुद्र
तरंगा=      Waves =    लहरें (धाराएं)
तब =            Your =            तुम्हारा
शुभ =        Auspicious =      मंगल
नामे =          name =                नाम
जागे=          Awaken =          जागो
तब =             Your =            तुम्हारा
शुभ =         Auspicious =      मंगल
आशीष=    Blessings =   आशीर्वाद
मांगे =            Ask =                पूछो
गाहे =            Gaahe =          गाओ
तब =              Your =          तुम्हारी
जय =            Victory =          जीत
गाथा =              Song =            गीत
जन =               People =         लोग
गण =              Group =          समूह
मंगल =          Fortune =        भाग्य
दायक =           Giver =           दाता
जय हे =          Victory Be =    जीत
भारत =          India =        हिंदुस्तान
भाग्य =         Destiny =       किस्मत
विधाता =   Dispenser= ऊपर वाला

जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे.=    Victory,
Victory, Victory, Victory Forever = 
विजय, विजय, विजय, विजय हमेशा के लिए....
जय हिंद = JAIHIND.
अगर आपको ये जानकारी पसंद आये तो  शेयर
करना ना भूले.... धन्यवाद!!

Wednesday, 24 January 2018

Jauhar Of Queen Padmavati In Hindi

आइये अब पद्मिनी जी और अलाउद्दीन प्रकरण पर प्रकाश करते है
@ रानी पद्मावती का जौहर
बारहवीं और तेरहवीं सदी में दिल्ली के सिंहासन पर मुग़ल सल्तनत का राज था।
सुल्तान ने अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए कई बार मेवाड़ पर आक्रमण किया। इन आक्रमणों में से एक आक्रमण अलाउदीन खिलजी ने माँ पद्मिनी को पाने के लिए किया था।
माँ पद्मावती के पिता का नाम गंधर्वसेन और माता का नाम चंपावती था। माँ पद्मावती के पिता गंधर्वसेन सिंहल प्रान्त के राजा थे। बचपन में माँ पद्मिनी के पास “हीरामणी” नाम का बोलता तोता हुआ करता था जिसके साथ उन्होनें अपना अधिकतर समय बिताया था। माँ पद्मावती बचपन से ही बहुत सुंदर थी और बड़ी होने पर उनके पिता ने उनका स्वयंवर आयोजित किया। इस स्वयंवर में उन्होनें सभी हिन्दू राजाओं को बुलाया।
राजा रावल रतन सिंह भी पहले से ही अपनी एक पत्नी नागमती होने के बावजूद स्वयंवर में आये थे। प्राचीन समय में राजा एक से अधिक विवाह करते थे ताकि वंश को अधिक उत्तराधिकारी मिले। राजा रावल रतन सिंह ने सभी को स्वयंमर में हराकर माँ पद्मावती से विवाह कर लिया। विवाह के बाद वो अपनी दुसरी पत्नी माँ पद्मावती के साथ वापस चित्तोड़ लौट आये।
उस समय चित्तोड़ पर राजपूत राजा रावल रतन सिंह का राज था। एक अच्छे शासक और पति होने के अलावा रतन सिंह कला के संरक्षक भी थे। उनके दरबार में कई प्रतिभाशाली लोग थे जिनमें से राघव चेतन संगीतकार भी एक था। राघव चेतन के बारे में लोगों को ये पता नही था कि वो एक जादूगर भी है। वो अपनी इस बुरी प्रतिभा का उपयोग दुश्मन को मार गिराने में उपयोग करता था। एक दिन राघव चेतन का बुरी आत्माओं को बुलाने का कृत्य रंगे हाथो पकड़ा जाता है। इस बात का पता चलते ही रावल रतन सिंह ने उग्र होकर उसका मुँह काला करवाया और गधे पर बिठाकर अपने राज्य से निर्वासित कर दिया। रतन सिंह की इस कठोर सजा के कारण राघव चेतन उनका दुश्मन बन गया।
अपने अपमान से नाराज होकर राघव चेतन दिल्ली चला गया। जहाँ पर वो दिल्ली के सुल्तान अलाउदीन खिलजी को चित्तोड़ पर आक्रमण करने के लिए उकसाने का लक्ष्य लेकर गया। दिल्ली पहुँचने पर राघव चेतन दिल्ली के पास एक जंगल में रुक गया जहाँ पर सुल्तान अक्सर शिकार के लिया आया करता था। एक दिन जब उसको पता चला कि सुल्तान का शिकार दल जंगल में प्रवेश कर रहा है तो राघव चेतन ने अपनी बांसुरी से मधुर स्वर निकालना आरंभ कर दिया।
जब राघव चेतन की बांसुरी के मधुर स्वर ख़िलजी के शिकार दल तक पहुँची तो सभी इस विचार में पड़ गये कि इस घने जंगल में इतनी मधुर बांसुरी कौन बजा सकता है! ख़िलजी ने अपने सैनिको को बांसुरी वादक को ख़ोज कर लाने को कहा। जब राघव चेतन को उसके लड़ाकों ने अलाउदीन खिलजी के समक्ष प्रस्तुत किया तो ख़िलजी ने उसकी प्रशंसा करते हुए उसे अपने दरबार में आने को कहा। चालाक राघव चेतन ने उसी समय राजा से पूछा कि “आप मुझ जैसे साधारण संगीतकार को क्यों बुलाना चाहते है जबकि आपके पास कई सुंदर वस्तुएँ हैं।”
राघव चेतन की बात ना समझते हुए खिलजी ने साफ़ साफ़ बात बताने को कहा। राघव चेतन ने ख़िलजी को माँ पद्मावती की सुन्दरता का बखान किया जिसे सुनकर खिलजी की वासना जाग उठी। अपनी राजधानी पहुँचने के तुरंत बात उसने अपनी सेना को चित्तौड़ पर आक्रमण करने को कहा क्योंकि उसका सपना उस सुन्दरी को अपने हरम में रखना था।
बेचैनी से चित्तौड़ पहुँचने के बाद अलाउदीन को चित्तौड़ का किला भारी रक्षण में दिखा। प्रसिद्द सुन्दरी माँ पद्मावती की एक झलक पाने के लिए ख़िलजी बेताब हो गया और उसने राजा रतन सिंह को ये कहकर भेजा कि वो माँ पद्मावती को अपनी बहन समान मानता है और उनसे मिलना चाहता है। ख़िलजी की बात सुनते ही रतन सिंह उसके रोष से बचने और अपना राज्य बचाने के लिए उसकी बात से सहमत हो गये। माँ पद्मावती अलाउदीन को कांच में अपना चेहरा दिखाने के लिए तैयार हो गयी। जब अलाउदीन को ये खबर पता चली कि माँ पद्मावती उससे मिलने को तैयार हो गयी है तो वो अपने चुनिंदा लड़ाकों के साथ सावधानी से किले में प्रवेश कर गया।
माँ पद्मावती के सुंदर मुख को कांच के प्रतिबिम्ब में जब अलाउदीन खिलजी ने देखा तो उसने सोच लिया कि माँ पद्मावती को अपनी बनाकर रहेगा।
वापस अपने शिविर में लौटते वक़्त अलाउदीन कुछ समय के लिए रतन सिंह के साथ चल रहा था। खिलजी ने मौका देखकर रतन सिंह को बंदी बना लिया और माँ पद्मावती की मांग करने लगा।
सेनापति गोरा और बादल ने ख़िलजी को हराने के लिए एक चाल चलते हुए खिलजी को सन्देशा भेजा कि अगली सुबह माँ पद्मावती को ख़िलजी को सौंप दिया जायेगा।
अगले दिन सुबह भोर होते ही 150 पालकियाँ किले से खिलजी के शिविर की तरफ रवाना हुई। पालकियाँ वहा रुक गई जहाँ पर रतन सिंह को बंदी बना रखा था।
पालकियों को देखकर रतन सिंह ने सोचा कि ये पालकियाँ किले से आईं हैं और उनके साथ रानी भी यहाँ आई होंगीं। वो अपने आप को बहुत अपमानित समझने लगा।
उन पालकियों में ना ही उनकी रानी और ना ही दासियाँ थीं और अचानक से उसमें से पूरी तरह से सशस्त्र योद्धा निकले और रतन सिंह को छुड़ा दिया और खिलजी के अस्तबल से घोड़े चुराकर तेजी से घोड़ों पर पर किले की ओर भाग गये। सेनापति गोरा इस मुठभेड़ में बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गये जबकि बादल ने रतन सिंह को सुरक्षित किले में पहुँचा दिया।
जब ख़िलजी को पता चला कि उसकी योजना नाकाम हो गयी तब ख़िलजी ने गुस्से में आकर अपनी सेना को चित्तौड़ पर आक्रमण करने का आदेश दिया। ख़िलजी के सेना ने किले में प्रवेश करने की कड़ी कोशिश की लेकिन नाकाम रहा।
अब खिलजी ने किले की घेराबंदी करने का निश्चय किया। ये घेराबंदी इतनी कड़ी थी कि किले में खाद्य आपूर्ति धीरे-धीरे समाप्त हो गई। अंत में रतन सिंह ने द्वार खोलने का आदेश दिया और उसके लड़ाकों से लड़ते हुए रतन सिंह वीरगति को प्राप्त हो गये।
ये सूचना सुनकर माँ पद्मावती ने सोचा कि अब सुल्तान की सेना चित्तौड़ के सभी पुरुष योद्धाओं को मार देगी। अब चित्तौड़ की औरतों के पास दो विकल्प थे या तो वो जौहर के लिए प्रतिबद्ध हो या विजयी सेना के समक्ष अपना निरादर सहें!
सभी वीरांगनाओं का पक्ष जौहर की तरफ था। एक विशाल चिता जलाई गई और माँ पद्मावती के बाद चित्तौड़ की सारी वीरांगनाएँ उसमें कूद गईं और इस प्रकार दुश्मन बाहर खड़े देखते रह गये। अपनी वीरांगनाओं के जौहर करने पर चित्तौड़ के योद्धाओं के पास जीवन में कुछ शेष नहीं था।
चित्तौड़ के सभी पुरुषों ने साका प्रदर्शन करने का प्रण लिया जिसमें प्रत्येक सैनिक केसरी वस्त्र और पगड़ी पहनकर दुश्मन सेना से तब तक लड़े जब तक कि वो सभी वीरगति को प्राप्त नहीं हो गये।
विजयी कूर ख़िलजी की सेना ने जब किले में प्रवेश किया तो उनको राख और जली हुई हड्डियों के साथ सामना हुआ।
ख़िलजी को घोर निराशा हुई।

Thursday, 18 January 2018

Symbol Of Knowledge Dr. Bheem Rao Ambedkar In Hindi

बधाई..... हो उस देश को

उस देश के राष्ट्पति को जो सात समन्दर पार रहते हुए भी, उस देश के न होते हुए ईमानदारी  से सर्वे कराया

जो कार्य भारतीय सरकार को करना चाहिए था, पर नही किया ।
चाहे कांग्रेस की सरकार हो या बीजेपी

वह कार्य अमेरिका ने कर दिखाया ।

🗽अमेरिका🗽 के विश्व प्रसिद्ध
कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेँ मुख्य दरवाजे के अंदर कि ओर जिनका फोटो लगाया गया है।

वो है — डॉ. भीमराव अंबेडकर जी —

👇 Point Note Down 👇

वहाँ ऐसा लिखा हैं,

हमे गर्व है कि, ऐसा छात्र हमारी यूनिवर्सिटी से पढकर गया है.. और उसने भारत का संविधान लिखकर उस देश पर बड़ा उपकार किया है !

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 300 साल पूरे होने के उपलक्ष्य मेँ, पूरे 300 सालो मेँ इस यूनिवर्सिटी से सबसे होशियार छात्र कौन रहा ? इसका सर्वे किया गया !

उस सर्वे मे 6 नाम सामने आए
उसमे नं. 👇1⃣👇 पर नाम था
— डॉ. भीमराव अंबेडकर जी —

बाबा साहेब के सम्मान मेँ कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मुख्य दरवाजे पर, उनकी कांस्य प्रतिमा लगायी गयी, उस मूर्ती का अनावरण अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा के करकमलो से किया गया !

👇उस मूर्ती के नीचे लिखा गया है👇
📚 "सिम्बॉल ऑफ नॉलेज" 📚
  📖 यानि ज्ञान का प्रतीक 📖

चाय बेचने वाले मोदी
Prime Minister बने.....
सबने सब को बताया

लेकिन कभी किसी ने ये नही बताया...

Class Room के बाहर बैठकर पढने वाला
एक दलित बालक
डा• भीम राव अम्बेडकर
इस देश का शिल्पकार
संविधान निर्माता बना.....

और सबसे बढकर इस ससांर में
''सिबंल आफॅ नाॅलेज'' बना....

कुछ लोग तो इसे शेयर करने से भी बचेंगे कि कहीं उनकी छवि खराब न हो जाए।

आप में अगर हिम्मत है तो

फारवर्ड टू ऑल।

Important Things Relating To Life In Hindi

जीवन के 6 सत्य

1. कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने खूबसूरत हैं ?

क्योंकि..लँगूर और गोरिल्ला भी अपनी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित कर लेते हैं..

2. कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका शरीर कितना विशाल और मज़बूत है ?

क्योंकि.. श्मशान तक आप अपने आपको नहीं ले जा सकते....

3. आप कितने भी लम्बे क्यों न हों,,

मगर आने वाले कल को आप नहीं देख सकते..

4. कोई फर्क नहीं पड़ता कि , आपकी त्वचा कितनी गोरी और चमकदार है..

क्योंकि..अँधेरे में रोशनी की जरूरत पड़ती ही है..

5 . कोई फर्क नहीं पड़ता कि "आप" नहीं हँसेंगे तो सभ्य कहलायेंगे ?

क्यूंकि.. "आप " पर हंसने के लिए दुनिया खड़ी है ?

6. कोई फर्क नहीं पड़ता कि, आप कितने अमीर हैं ? और दर्जनों गाड़ियाँ आपके पास हैं ?

क्योंकि.. घर के बाथरूम तक आपको चल के ही जाना पड़ेगा..

इसलिए संभल के चलिए.. संभल के बोलिए.. ज़िन्दगी का सफर छोटा है, हँसते हँसते काटिये, आनंद आएगा ।

सदैव मुस्कुराते रहिये

Tuesday, 16 January 2018

Reality Of Hajj Subsidy Provided By Indian Government In Hindi

"हज सब्सिडी मात्र एक छलावा था"
ख़त्म हुआ हम स्वागत करते हैं।

आम लोगों को तो जानकारी है कि सरकार हज यात्रा पर जाने वाले यात्रियों जो की हज कमेटी द्वारा यात्रा पर जाते हैं, इस यात्रा पर सब्सिडी देती है पर यह इस पवित्र यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के साथ एक सोचा समझा छलावा और धोखे से कम नहीं है। अपनी छिछोरी राजनीति एवं मुस्लमानों के साथ दुष्प्रचार के सिवा कुछ नही। हमारे ग़ैर मुस्लिम भाई भी अक्सर हज सब्सिडी को लेकर पसोपेश में रहते हैं, और कुछ लोग इसे नफ़रत से भी देखते है और सोचते है कि हज सब्सिडी की आड़ मैं सरकार मुसलमानों पर ईतनी महरबान क्यों है ?
परंतु सच कुछ और ही है, दरअसल इसमें सरकार का अपना फ़ायदा छिपा हुआ है और इसकी आड़ मे इंडीयन एयरलाइन्स को पाला पोसा जाता है,

"हज सब्सिडी क्या है, पहले इसे समझें"
हाजियो को हज करने सऊदी अरब जाना होता है हज को जाने वाले हज़रात को हज कमेटी ऑफ़ इंडिया तीन कैटेग्री में से कोई एक को अपनी मर्ज़ी से चुनने का मौक़ा देती है, और ये कैटेग्री है "ग्रीन, अज़ीज़िया और व्हाईट,
हर कैटेग्री के चार्जेज़ अलग अलग हैं,,जो हाजियों को  सउदिया में हज के दौरान मुहय्या करवाई जाती हैं, उन तीनों कैटेगिरी की सुहूलियते भी चार्ज के मुताबिक़ अलग अलग हैं। लेकिन हवाई जहाज़ का किराया सब के लिये एक समान है जो तक़रीबन 57 हज़ार रूपये है, और सबसे अहम बात ये है की इतने ही किराए में कोई भी मुसाफिर ऑफ़ सीज़न मे लन्दन तक भी जा सकता है, जबकि वहाँ की दूरी सउदिया के मुकाबले कई गुना ज़्यादा है,
भारत सरकार हाजियों को ले जाने के लिए सिर्फ  इंडियन एयरलाइन को ही जिम्मेदारी देती है जबकि हमारी सोच है हज के लिये ओपन टेनडर होना चाहिये बल्कि सरकार को इसके लिए ग्लोबल टेंडर के ज़रिये  एयर लाइन्स कंपनियों को इन्वाइट करना चाहिए, कोई भी प्राइवेट एयर बस सर्विस इस दूरी के लिए सिर्फ 18000/- से 20000/- में तय्यार हो सकती है और बल्की ईकट्ठा इतने मुसाफ़िरों के लिए एयर बस सर्विसेस और भी कम 12000/- से 15000/- तक किराया लेने के लिए तय्यार हो सकती है, मगर  सरकार ऐसा नहीं चाहती ..क्यूंकि उसका मकसद छिपे तौर पर  Air India को ही फ़ायदा पहुँचाना है , एयर इंडिया की हालत लगातार ख़राब होती जा रही है, और आम दिनों में उसकी एयर बसों में पचास परसेन्ट से ज़्यादा सीटें खाली रहती हैं,,,,
सरकार हज सब्सिडी की आड़ में एयर इंडिया को जबरन 57000/- रूपये फी ( एक हाजी के ) भर रही है जिसमें हाजियों से पन्द्रह हज़ार के क़रीब लिए जाते हैं और बक़ाया सरकारी ख़ज़ाने से एयर इंडिया को भुगतान किया जाता है,,,,,
फ़्लाईट के टेन्डर के वक्त एबीएशन मिनिस्टरी और सेन्ट्रल हज कमेटी के मेमबरान के मशवरे भी लिये जाते है,,,हाजियों से ही वसूल किये गये पैसों में से कुछ पैसे सरकार हज सब्सिडी के नाम पर हाजियों को वापस कर दिए जाते है, और इस हज सब्सिडी की आड़ मे सरकार इन्डियन एयर लाइन के साल भर के घाटे की भरपाई कर रही है, दूसरी तरफ सऊदिया सरकार इंडियन एयरलाइन्स को हाजियों की वापसी का """पैट्रोल """मुफ़्त मुहय्या करवाती है,
हाँ सब्सिडी ख़त्म होने पर हाजियों पर 5 से 10 हज़ार का बोझ तो बढ़ सकता है परंतु मुस्लिम ऑर्गनाइज़ेशन्स और देश के मुस्लिमों ने हमेशा हज सब्सिडी को ख़त्म करने की मांग भी की है, सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को हुक्म दिया था कि दस साल के अन्दर मुसलमानों को हज के दौरान दी जाने वाली सब्सिडी ख़त्म करे, सुप्रीम कोर्ट के उस वक्त के जस्टिस आफ़ताब आलम और रंजना प्रकाश देसाई की बैंच ने ये तारीखी फ़ैसला देते वक्त कुरान-ए-करीम का हवाला भी दिया था जिसमें
ये कहा गया है कि हज मुसलमान को अपने ख़र्च पर ही हज अदा करना चाहिये, मगर देश के मुसलमान चाहते हैं, की हज सब्सिडी जल्द से जल्द ख़त्म कर दी जाये, यह पहली सब्सिडी है जिस कौम को मिल रही है वही कौम इसे बंद करने की मांग भी कर रही है, अगर भारत सरकार हज सब्सिडी बंद कर दे तो हाजी अपनी पसंद की एयर लाईन्स से जा सकेंगे, और अपनी पसंद के होटल में ठहर सकेंगे, ना एक ही एयर लाईन्स से जाने का झंझट होगा और ना एक ही होटल में ठहरने की मज़बूरी, अगर हज सब्सिडी बंद कर दी जाये तो प्राइवेट एयर लाईन्स हाजियो के लिए कई किफायती स्कीमें लांच करेंगी, जिसका सीधा फायदा हाजियो को होगा, इसलिए देश के मुसलमान चाहते हैं, की हज सब्सिडी फ़ौरन बंद कर दी जाये।

आख़िर में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त से दुआ है की वो अपने प्यारे महबूब हज़रत मोहम्मद मुस्तुफ़ा ﷺ के सदके में तमाम उम्मतियों को हज नसीब फ़रमाए।

आमीन या रब्बुल आल'मिन

Monday, 15 January 2018

Real Truth Of Indian Constitution In Hindi

👇संविधान का सच्च 👇

👉पेज न.132 -

15 अगस्त 1947
पार्टिशन के बाद जो मुस्लिम अपनी इच्छा से भारत में रहना चाहता है बा इज़्ज़त भारत में रह सकता है क्यों की ये वो मुस्लिम है जिनके पुर्वजो ने भारत की आजादी में पूरा पूरा योगदान दिया और भारत के लिए बलिदान दिया ।

👉पेज न 156 -

आरएसएस देश का सबसे बड़ा दुशमन है क्युकी इस संघठन ने भारत की आजादी के वक्त तिरंगा जलाया था और माहात्मा गाधी का हत्यारा आरएसएस पार्टी का नेता था और आरएसएस पर बैन लगाया।

👉1956 में जब आरएसएस पर से बैन हटाया तब कुछ शर्ते रखी वो शर्ते ये है की आरएसएस कभी भी राजनीती पार्टी में भाग नहीं लेगी सविधान में कभी शामिल नहीं होगी देशभक्त पार्टी कभी नही बनेगी सिर्फ एक संगठन ही चलाएगी ।

👉पेज न 197 -

1971,
370 धारा , कश्मीर का भारत में विलय यानि भारत देश में शामिल होना कश्मीर एक आजाद देश था जिसे पाकिस्तान अपने देश में शामिल करना चाहता था इसको भारत में शामिल करने के लिए कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया यानि 370 धारा ।

👉और अब ये 370 धारा क्या है ?
और कश्मीर में क्यों लगी है ?
और क्यों नहीं हट सकती ?
370 धारा में ये है की कश्मीर में 6 साल का कार्यकाल है कोई भी व्यक्ति कश्मीर की लड़की से शादी कर के वहां की नागरिकता पा सकता है कश्मीर के अलावा बाहर का कोई भी इन्सान वहा पर जमीन नहीं खरीद सकता कश्मीर के पास केंद्र के सभी अधिकार है रक्षा और सूचना मंत्रालय छोड़ कर ।।

👉हस्ताक्षर -

1.मोहम्मद अली जिन्ना ,
2.पंडित जवाहर लाल नेहरु ,
3.इंद्रा गांधी,
4.जरनल गेरी रिच्ल्ड ।।

👉ये सब साफ़ साफ सविधान में लिखा है। फिर भी भगवा पार्टीयां मुस्लिमो को गद्दार समझती हैं और आरएसएस को देशभक्त पार्टी समझति है ।।

👉भाइयो ये बहुत ही काम की बात है । इसे इतना फारवर्ड करना के इन सब भगवाधारियों की हक़ीक़त ज़ाहिर हो जाये।

👉 भगवा धारी हमारी मजलिस की हिस्ट्री खोज खोज कर सोशल नेटवर्किंग पर फैला रहे हैं । अब हम इनकी हिस्ट्री भी दुनिया के सामने ला कर इनकी असलियत बता देंगे।