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Monday, 29 January 2018

First January Special In Hindi

1 जनवरी विशेष कृपया अवश्य शेयर करे।

कलेंडर बदलिए अपनी संस्कृति नही।
अपनी संस्कृति की झलक को अवश्य पढ़ें और साझा करें ।।

1 जनवरी को क्या नया हो रहा है ?????

न ऋतु बदली.. न मौसम
न कक्षा बदली.. न सत्र
न फसल बदली..न खेती
न पेड़ पौधों की रंगत
न सूर्य चाँद सितारों की दिशा
ना ही नक्षत्र।।

1 जनवरी आने से पहले ही सब नववर्ष की बधाई देने लगते हैं। मानो कितना बड़ा पर्व हो।
नया केवल एक दिन ही नही
कुछ दिन तो नई अनुभूति होनी ही चाहिए। आखिर हमारा देश त्योहारों का देश है।

ईस्वी संवत का नया साल 1 जनवरी को
और भारतीय नववर्ष (विक्रमी संवत) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है।

आईये देखते हैं दोनों का तुलनात्मक अंतर

1. प्रकृति-
एक जनवरी को कोई अंतर नही जैसा दिसम्बर वैसी जनवरी..
वही चैत्र मास में चारो तरफ फूल खिल जाते हैं, पेड़ो पर नए पत्ते आ जाते हैं। चारो तरफ हरियाली मानो प्रकृति नया साल मना रही हो I

2. मौसम, वस्त्र-
दिसम्बर और जनवरी में वही वस्त्र, कंबल, रजाई, ठिठुरते हाथ पैर.. लेकिन
चैत्र मास में सर्दी जा रही होती है, गर्मी का आगमन होने जा रहा होता है I

3. विद्यालयो का नया सत्र-
दिसंबर जनवरी मे वही कक्षा कुछ नया नहीं..
जबकि मार्च अप्रैल में स्कूलो का रिजल्ट आता है नई कक्षा नया सत्र यानि विद्यालयों में नया साल I

4. नया वित्तीय वर्ष-
दिसम्बर-जनबरी में कोई खातो की क्लोजिंग नही होती..
जबकि 31 मार्च को बैंको की (audit) क्लोजिंग होती है नए बही खाते खोले जाते है I सरकार का भी नया सत्र शुरू होता है I

5. कलैण्डर-
जनवरी में नया कलैण्डर आता है..
चैत्र में नया पंचांग आता है I उसी से सभी भारतीय पर्व, विवाह और अन्य महूर्त देखे जाते हैं I इसके बिना हिन्दू समाज जीवन की कल्पना भी नही कर सकता इतना महत्वपूर्ण है ये कैलेंडर यानि पंचांग I

6. किसानो का नया साल- दिसंबर-जनवरी में खेतो में वही फसल होती है..

जबकि मार्च-अप्रैल में फसल कटती है नया अनाज घर में आता है तो किसानो का नया वर्ष और उत्साह I

7. पर्व मनाने की विधि-
31 दिसम्बर की रात नए साल के स्वागत के लिए लोग जमकर शराब पीते है, हंगामा करते है, रात को पीकर गाड़ी चलने से दुर्घटना की सम्भावना, रेप जैसी वारदात, पुलिस प्रशासन बेहाल और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का विनाश..

जबकि भारतीय नववर्ष व्रत से शुरू होता है पहला नवरात्र होता है घर घर मे माता रानी की पूजा होती है I शुद्ध सात्विक वातावरण बनता है I

8. ऐतिहासिक महत्त्व-
1 जनवरी का कोई ऐतिहासिक महत्व नही है..

जबकि चैत्र प्रतिपदा के दिन महाराज विक्रमादित्य द्वारा विक्रमी संवत् की शुरुआत, भगवान झूलेलाल का जन्म, नवरात्रे प्रारंम्भ, ब्रम्हा जी द्वारा सृष्टि की रचना इत्यादि का संबंध इस दिन से है I

एक जनवरी को अंग्रेजी कलेंडर की तारीख और अंग्रेज मानसिकता के लोगो के अलावा कुछ नही बदला..
अपना नव संवत् ही नया साल है I
जब ब्रह्माण्ड से लेकर सूर्य चाँद की दिशा, मौसम, फसल, कक्षा, नक्षत्र, पौधों की नई पत्तिया, किसान की नई फसल, विद्यार्थीयों की नई कक्षा, मनुष्य में नया रक्त संचरण आदि परिवर्तन होते है। जो विज्ञान आधारित है I
अपनी मानसिकता को बदले I विज्ञान आधारित भारतीय काल गणना को पहचाने। स्वयं सोचे की क्यों मनाये हम 1 जनवरी को नया वर्ष..??

"एक जनवरी को कैलेंडर बदलें, अपनी संस्कृति नहीं"

आओ जागेँ जगायेँ, भारतीय संस्कृति अपनायेँ और आगे बढ़े I

Monday, 15 January 2018

Why Do We Celebrate Makar Sankranti / What Is Makar Sankranti In Hindi

मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। मकर संक्रान्ति पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है। यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है क्योंकि इसी दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी प्रारम्भ होती है। इसलिये इस पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं। तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं।

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं

Wednesday, 15 November 2017

Bhakt Ke Vash Mein Hai Bhagwan

#भक्त_के_वश_में_है_भगवान्   🌿🌹🌿🌹
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धन्ना जाट -
बहुत ही सुंदर कथा है

किसी समय एक गांव में भागवत कथा का आयोजन किया गया, एक पंडित जी
भागवत कथा सुनाने आए। पूरे सप्ताह कथा वाचन चला। पूर्णाहुति पर दान दक्षिणा
की सामग्री इक्ट्ठा कर घोडे पर बैठकर पंडितजी रवाना होने लगे। उसी गांव में एक
सीधा-सदा गरीब किसान भी रहता था जिसका नाम था धन्ना जाट। धन्ना जाट ने
उनके पांव पकड लिए। वह बोला- पंडितजी महाराज ! आपने कहा था कि जो ठाकुरजी
की सेवा करता है उसका बेडा पार हो जाता है।आप तो जा रहे है। मेरे पास न तो ठाकुरजी
है, न ही मैं उनकी सेवा पूजा की विधि जानता हूं। इसलिए आप मुझे ठाकुरजी देकर पधारें।
पंडित जी ने कहा- चौधरी, तुम्हीं ले आना।
धन्ना जाट ने कहा - मैंने तो कभी ठाकुर जी देखे नहीं, लाऊंगा कैसे ?
पंडित जी को घर जाने की जल्दी थी। उन्होंने पिण्ड छुडाने को अपना भंग घोटने का सिलबट्टा उसे दिया और बोले- ये ठाकुरजी है। इनकी सेवा पूजा करना।
धन्ना जाट ने कहा - महाराज में सेवा पूजा का तरीका भी नहीं जानता। आप ही बताएं।
पंडित जी ने कहा - पहले खुद नहाना फिर ठाकुरजी को नहलाना। इन्हें भोग चढाकर फिर खाना।
इतना कहकर पंडित जी ने घोडे के एड लगाई व चल दिए।
धन्ना सीधा एवं सरल आदमी था। पंडितजी के कहे अनुसार सिलबट्टे को बतौर ठाकुरजी अपने घर में स्थापित कर दिया। दूसरे दिन स्वयं स्नान कर सिलबट्टे रूप ठाकुरजी को नहलाया। विधवा मां का बेटा था। खेती भी ज्यादा नहीं थी। इसलिए भोग मैं अपने
हिस्से का बाजरी का टिक्कड एवं मिर्च की चटनी रख दी। ठाकुरजी से धन्ना ने कहा
पहले आप भोग लगाओ फिर मैं खाऊंगा। जब ठाकुरजी ने भोग नहीं लगाया तो बोला- पंडित जी तो धनवान थे। खीर- पूडी एवं मोहन भोग लगाते थे। मैं तो गरीब जाट का
बेटा हूं, इसलिए मेरी रोटी चटनी का भोग आप कैसे लगाएंगे ? पर साफ-साफ सुन लो
मेरे पास तो यही भोग है। खीर पूडी मेरे बस की नहीं है।
ठाकुरजी ने भोग नहीं लगाया तो धन्ना भी सारा दिन भूँखा रहा।
इसी तरह वह रोज का एक बाजरे का ताजा टिक्कड एवं मिर्च की चटनी रख देता
एवं भोग लगाने की अरजी करता।
ठाकुरजी तो पसीज ही नहीं रहे थे। यह क्रम नरंतर छह दिन तक चलता रहा। छठे दिन धन्ना बोला-ठाकुरजी, चटनी रोटी खाते क्यों शर्माते हो ? आप कहो तो मैं आंखें मूंद लू
फिर खा लो। ठाकुरजी ने फिर भी भोग नहीं लगाया तो नहीं लगाया। धन्ना भी भूखा
प्यासा था। सातवें दिन धन्ना जट बुद्धि पर उतर आया। फूट-फूट कर रोने लगा एवं
कहने लगा कि सुना था आप दीन-दयालु हो, पर आप भी गरीब की कहां सुनते हो,
मेरा रखा यह टिककड एवं चटनी आकर नहीं खाते हो तो मत खाओ। अब मुझे भी
नहीं जीना है, इतना कह उसने सिलबट्टा उठाया और सिर फोडने को तैयार हुआ,
अचानक सिलबट्टे से एक प्रकाश पुंज प्रकट हुआ एवं धन्ना का हाथ पकड कहा
- देख धन्ना मैं तेरा चटनी टिकडा खा रहा हूं।
ठाकुरजी बाजरे का टिक्कड एवं मिर्च की चटनी मजे से खा रहे थे।
जब आधा टिक्कड खा लिया. तो धन्ना बोला- क्या ठाकुरजी मेरा पूरा टिक्कड खा
जाओगे ? मैं भी छह दिन से भूखा प्यासा हूं। आधा टिक्कड तो मेरे लिए भी रखो।
ठाकुरजी ने कहा - तुम्हारी चटनी रोटी बडी मीठी लग रही है तू दूसरी खा लेना।
धन्ना ने कहा - प्रभु ! मां मुझे एक ही रोटी देती है। यदि मैं दूसरी लूंगा तो मां भूखी रह जाएगी।
प्रभु ने कहा-फिर ज्यादा क्यों नहीं बनाता।
धन्ना ने कहा - खेत छोटा सा है और मैं अकेला।
ठाकुरजी ने कहा - नौकर रख ले।
धन्ना बोला-प्रभु, मेरे पास बैल थोडे ही हैं मैं तो खुद जुतता हूं।
ठाकुरजी ने कहा-और खेत जोत ले।
धन्ना ने कहा-प्रभु, आप तो मेरी मजाक उडा रहे हो। नौकर रखने की हैसियत हो तो
दो वक्त रोटी ही न खा लें हम मां-बेटे।
इस पर ठाकुरजी ने कहा - चिन्ता मत कर मैं तेरी सहायता करूंगा।
कहते है तबसे ठाकुरजी ने धन्ना का साथी बनकर उसकी सहायता करनी शुरू की।
धन्ना के साथ खेत में कामकाज कर उसे अच्छी जमीन एवं बैलों की जोडी दिलवा दी।
कुछे अर्से बाद घर में गाय भी आ गई। मकान भी पक्का बन गया। सवारी के लिए घोडा
आ गया। धन्ना एक अच्छा खासा जमींदार बन गया। कई साल बाद पंडितजी पुनः
धन्ना के गांव भागवत कथा करने आए। धन्ना भी उनके दर्शन को गया। प्रणाम कर बोला-
पंडितजी, आप जो ठाकुरजी देकर गए थे वे छह दिन तो भूखे प्यासे रहे एवं मुझे भी
भूखा प्यासा रखा। सातवें दिन उन्होंने भूख के मारे परेशान होकर मुझ गरीब की
रोटी खा ही ली।
उनकी इतनी कृपा है कि खेत में मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर हर काम में मदद करते है।
अब तो घर में गाय भी है।सात दिन का घी-दूध का ‘सीधा‘ यानी बंदी का घी- दूध मैं ही भेजूंगा।
पंडितजी ने सोचा मूर्ख आदमी है। मैं तो भांग घोटने का सिलबट्टा देकर गया था।
गांव में पूछने पर लोगों ने बताया कि चमत्कार तो हुआ है। धन्ना अब वह गरीब नहीं
रहा। जमींदार बन गया है। दूसरे दिन पंडितजी ने धन्ना से कहा-कल कथा सुनने आओ
तो अपने साथ अपने उस साथी को ले कर आना जो तुम्हारे साथ खेत में काम करता है।
घर आकर धन्ना ने प्रभु से निवेदन किया कि कथा में चलो तो प्रभु ने कहा - मैं नहीं
चलता तुम जाओ।
धन्ना बोला - तब क्या उन पंडितजी को आपसे मिलाने घर ले आऊ।
प्रभु ने कहा - बिल्कुल नहीं।
मैं झूठी कथा कहने वालों से नहीं मिलता। जो मुझसे सच्चा प्रेम करता है और
जो अपना काम मेरी पूजा समझ करता है मैं उसी के साथ रहता हूं।
सत्य ही कहा गया है "भगत के वश में है भगवान्"

🌺🌳🌺🌳🌺🌳🌺🌳🙏

Tuesday, 10 October 2017

Difference Between Love And Like / प्रेम और पसंद में अंतर

" ' प्रेम और  पसंद '  दोनों  में   क्या  अंतर  है ?

" इसका  सबसे  सुन्दर  जवाब  गौतम  बुद्ध  ने  दिया  है- अगर  तुम  एक  फूल  को  पसंद  करते  हो  तो  तुम  उसे  तोड़कर  रखना  चाहोगे ,,

" लेकिन  अगर  उस  फूल  से  प्रेम  करते  हो  तो  तोड़ने  के  बजाय  तुम  रोज  उसमे  पानी  डालोगे  ताकि  फूल  मुरझाने  न  पाए ,," जिसने  भी  इस  रहस्य  को  समझ  लिया  समझो  उसने  पूरी  जिंदगी  को  ही  समझ  लिया ,,

Saturday, 7 October 2017

Though On Karva Chauth / करवाचौथ पर एक विचार

करवाचौथ पर एक विचार -
मैं करवाचौथ पर व्रत क्यों रखूंगी ?
क्योंकि यह मेरा तरीका है आभार व्यक्त करने का उस के प्रति जो हमारे लिए सब कुछ करता है। मैं व्रत करूंगी बिना किसी पूर्वाग्रह के , अपनी ख़ुशी से।

अन्न जल त्याग क्यों ?
क्योंकि मेरे लिए यह रिश्ता अन्न जल जैसी बहुत महत्वपूर्ण वस्तु से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। यह मुझे याद दिलाता है कि हमारा रिश्ता किसी भी चीज़ से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण है। यह मेरे जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्ति के होने की ख़ुशी को मनाने का तरीका है।

सजना सवरना क्यों ?
मेरे भूले हुए गहने साल में एक बार बाहर आते हैं। मंगलसूत्र , गर्व और निष्ठा से पहना जाता है। मेरे जीवन में मेहँदी , सिन्दूर ,चूड़ियां उनके आने से है तो यह सब मेरे लिए अमूल्य है। यह सब हमारे भव्य  संस्कारों और संस्कृति का हिस्सा हैं। शास्त्र दुल्हन के लिए सोलह सिंगार की बात करते हैं। इस दिन सोलह सिंगार कर के फिर से दुल्हन बन जाईये।  विवाहित जीवन फिर से खिल उठेगा।

कथा क्यों और वही एक कथा क्यों ?
एक आम जीव और एक दिव्य चरित्र देखिये कैसे इस कथा में एक हो जाते हैं। पुराना भोलापन कैसे फिर से बोला और पढ़ा जाता है , इसमें तर्क  से अधिक आप परंपरा के समक्ष सर झुकाती हैं। हम सब जानते हैं लॉजिक हमेशा काम नहीं करता। कहीं न कहीं  किसी चमत्कार की गुंजाईश हमेशा रहती है। वैसे भी तर्क के साथ  दिव्य चमत्कार की आशा किसी को नुक्सान नहीं पहुंचाती। 

मेरे पति को भी व्रत करना चाहिए ?
यह उनकी इच्छा है वैसे वो तो मुझे भी मना करते हैं। या खुद भी रखना चाहते हैं   ..मगर यह मेरा दिन है और सिर्फ मुझे ही वो लाड़ चाहिए। इनके साथ लाड़ बाँटूंगी नहीं इनसे लूंगी।

भूख , प्यास कैसे नियंत्रित करोगी ?
कभी कर के देखो क्या सुख मिलता है। कैसे आप पूरे खाली होकर फिर भरते हो इसका मज़ा वही जानता है , जिसने किया हो।

चन्द्रमा की प्रतीक्षा क्यों ?
असल  मे यही एक रात है जब मैं प्रकृति को अनुभव करती हूँ। हमारी भागती शहरी ज़िन्दगी में कब समय मिलता है कि चन्द्रमा को देखूं। इस दिन समझ आता है कि चाँद सी सुन्दर क्यों कहा गया था मुझे।

और हाँ !
अगर पति की इज़्ज़त नहीं करती , फेमिनिस्ट के चक्कर में हो और फालतू के कुतर्को से जूझ रही हो या बाजार के चक्कर में तोहफों का इंतज़ार कर रही  हो तो व्रत रहने ही दो। क्योंकि व्रत कर के किसी पर एहसान नहीं कर रही , यह तुम्हारी अपनी शुद्धि के लिए है। अगर करवाचौथ पर बने चुटकुले एक दूसरे को भेजती हों तो बिलकुल ही ना मनाये।

सभी को करवाचौथ की अग्रिम शुभकामनायें। आपका विवाहित जीवन आपकी आत्मा को पोषित करे और आपके जीवनसाथी का विचार आपके मुख पर सदैव मीठी मुस्कान लाये। अपने पति के लिए स्वास्थय एवं लम्बी आयु की कामना अवश्य करें। याद रखें  यह देश सावित्री जैसी देवियों का है जो मृत्यु से भी अपने पति को खींच लायी थी ,,,,,,,,,,,,, कुतर्कों पर मत जाईये अंदर की श्रद्धा को जगाईये !

Saturday, 2 September 2017

Beware Of People Who Can Create Problems For You

सावधान मुसीबत के कारण

शास्त्रों की मानें तो-
यही लोग आपके लिए मुसीबत का कारण बन सकते हैं।
इन लोगों के बारे में कहा जाता है कि-
इनकी आदतों के कारण आपको परेशानी हो सकती है।
दरअसल इन लोगों की आदतें और इनको जिम्मेदारी का अहसास न होना आपके लिए मुसीबत का सबब बन सकती हैं।
आज हम ऐसे ही लोगो के बारे में आपको बता रहा हूँ
विदुर नीति के अनुसार
अकर्मशीलं च महाशनं च लोक द्विष्टं बहुमायं नृशंसम् |
अदेशकालज्ञमनिष्टवेष मेतान् गृहे न प्रतिवासयेत ||
अकर्मण्य:
अकर्मण्य का मतलब होता है आलसी।
आलसी लोगों से हमेशा संभलकर रहना चाहिए।
संकट के समय अपने आलसीपन के कारण ये आपको मुसीबत में डाल सकते हैं।
अधिक भोजन करने वाले
अगर आपके पास अधिक भोजन ग्रहण करने वाले लोग रहते हैं तो इनसे संभलकर रहे हैं।
ये लोग हमेशा आप पर निर्भर रहते हैं और आलसी भी होते हैं।
गुस्से वाले और बहुत चालाक बनने वाले
ऐसे लोग जिनकों बहुत गुस्सा आता है वो भी खतरनाक साबित हो सकते हैं इन लोगों के कारण भी आप कभी भी मुसीबत में पड़ सकते हैं।
इसके अलावा अपने आप को चालाक समझने वाले
और दूसरों को धोखा देने वाले लोगों से भी आपको बचना चाहिए।
लोगों से झगड़ा करने वाले और
देश स्थान और समय का ज्ञान न रखने वाले
जो लोग देश और जगह के नियमों के नहीं जानते हैं
उनसे भी हमेशा बचकर रहना चाहिए।
इसके अलावा मर्यादित कपड़े न पहनने वाले भी आपके लिए मुसीबत का सबब बन सकते हैं।

Friday, 1 September 2017

Who Is Called A Saint By Tarun Sagar Ji Maharaj

साधु किसे कहते है ।

तरुण सागर जी महाराज----

#    जिसके पेरौ मे जूता नही
      सिर पर छाता नही
      बेंक  मे खाता नही
      परिवार से नाता नही
      उसे कहते है  साधु ।

#     जिसके तन पे कपडा नही
       वचन मे लफड़ा नही
       मन मे क्षगडा नही
       उसे कहते है साधु ।

#      जिसका कोई घर नही
        किसी बात का डर नही
        दुनिया का असर नही
        उसे कहते है  साधु ।

#      जिसके पास बीबी नही
        साथ टीवी नही
        अमीरी गरीबी नही
        नाश्ते मे जलेबी नही
        उसे कहते है  साधु ।

#      जो कचचे पानी को छूता नही 
         बिसतर पर सोता नही
         होटेल मे खाता नही
         उसे कहते है साधु ।

#       जिसे नाई की जररूत नही
          जिसे तेली की जररूत नही
          जिसे सुनार  की जररूत नही
          जिसे लुहार  की जररूत नही
          जिसे दर्जी  की जररूत नही
          जिसे व्यापार  की जररूत नही
          जिसे  धोबी की जररूत नही
          फिर भी सबको धोता है
          उसे कहते है  साधु ।

Reasons For Poverty In Home

घर में दरिद्रता आने के कुछ कारण....            ~~~~~~~~~~~~~~~~~~
1- रसोई घर के पास में पेशाब करना ।
2- टूटी हुई कंघी से कंघा करना ।
3- टूटा हुआ सामान उपयोग करना।
4- घर में कूड़ा-करकट रखना।
5- रिश्तेदारों से बदसुलूकी करना।
6- बांए पैर से पैंट पहनना।
7- सांध्या वेला मे सोना।
8- मेहमान आने पर नाखुश होना।
9- आमदनी से ज्यादा खर्च करना।
10- दाँत से रोटी काट कर खाना।
11- चालीस दिन से ज्यादा बाल रखना
12- दाँत से नाखून काटना।
13- औरतों का खड़े-खड़े बाल बाँधना।
14- फटे हुए कपड़े पहनना ।
15- सुबह सूरज निकलने के बाद तक सोते रहना।
16- पेड़ के नीचे पेशााब करना।
17- उल्टा सोना।
18- शमशान भूमि में हँसना ।
19- पीने का पानी रात में खुला रखना।
20- रात में मांगने वाले को कुछ ना देना ।
21- मन में बुरे ख्याल लाना।
22- पवित्रता के बगैर धर्मग्रंथ पढना।
23- शौच करते वक्त बातें करना।
24- हाथ धोए बगैर भोजन करना ।
25- अपनी औलाद को हरदम कोसना।
26- दरवाजे पर बैठना।
27- लहसुन प्याज के छीलके जलाना।
28- साधू फकीर को अपमानित करना, उनसे रोटी या फिर और कोई चीज खरीदना।
29- फूँक मार के दीपक बुझाना।
30- ईश्वर को धन्यवाद किए बगैर भोजन करना।
31- झूठी कसम खाना।
32- जूते चप्पल उल्टा देख कर उसको सीधा नहीं करना।
33- मकड़ी का जाला घर में रखना।
34- रात को झाड़ू लगाना।
35- अन्धेरे में भोजन करना ।
36- घड़े में मुँह लगाकर पानी पीना।
37- धर्मग्रंथ न पढ़ना।
38- नदी, तालाब में शौच साफ करना और उसमें पेशाब करना ।
39- गाय, बैल को लात मारना ।
40- माता-पिता का अपमान करना ।
41- किसी की गरीबी और लाचारी का मजाक उड़ाना ।
42- दाँत गंदे रखना और रोज स्नान न करना ।
43- बिना स्नान किये  भोजन करना ।
44- पड़ोसियों का अपमान करना, गाली देना ।
45- मध्यरात्रि में भोजन करना ।
46- गंदे बिस्तर पर सोना ।
47- वासना और क्रोध से भरे रहना ।
48- दूसरे को अपने से हीन समझना । इत्यादि-      ___________________________
💥 शास्त्रों में लिखा है- कि जो दूसरों का भला करता है, ईश्वर उसका भी भला करता है। मित्रों अच्छा व उपयोगी लगे तो अवश्य शेअर करें....

Wednesday, 30 August 2017

Radha Asking Moral Questions To Shri Krishna

✍ एक बार राधा जी ने कृष्णा से पूछा-
      गुस्सा क्या है.?

✍ बहुत खुबसूरत जवाब मिला-
      किसी की गलती की सजा
      खुद को देना.!

✍ एक बार राधा ने कृष्णा से पूछा-
     दोस्त और प्यार में क्या
     फर्क होता है.?

✍ कृष्णा हंस कर बोले-
       प्यार सोना है..
      और दोस्त हीरा..
      सोना टूट कर दुबारा बन सकता है..
      मगर हीरा नहीं.!

✍ एक बार राधा जी ने कृष्णा से पूछा-
      मैं कहाँ कहाँ हूँ.?

✍ कृष्णा ने कहा-
     तुम मेरे दिल में..
     साँस में..
     जिगर में..
     धड़कन में..
     तन में..
     मन में..
     हर जगह हो.!

✍ फिर राधा जी ने पूछा-
      मैं कहाँ नहीं हूँ.?

✍ तो कृष्णा ने कहा
      मेरी किस्मत में..!

✍ राधा ने श्री कृष्णा से पूछा-
     प्यार का असली मतलब क्या
     होता है.?

✍ श्री कृष्णा ने हंस कर कहा-
      जहाँ मतलब होता है..
      वहां प्यार ही कहाँ होता है..!

✍ एक बार राधा ने कृष्णा से पूछा-
      आपने मुझे प्रेम किया..
      लेकिन शादी रुकमणी से की..
      ऐसा क्यों.?

✍ कृष्णा ने हँसते हुए कहा- राधे !
      शादी में दो लोग चाहिए....
      और हम तो एक हैं....

😀😀😃😃

✍ ये special smile है,
इसे आप उन लोगों को
send kro जिन्हें आप
कभी उदास नहीं देखना चाहते ।
मैंने तो कर दिया ।
अब आपकी मर्जी....🙏😀

Sunday, 5 March 2017

महिलाओं के बालों पर न डालें हाथ, हो जाएगा वंश का नाश - पुराणों से

हिंदू शास्त्रों में महिलाओं के बालों से संबंधित बहुत से वृतांत मिलते हैं।

केश महिलाओं का श्रृंगार होते हैं जो उनकी खूबसूरती को बयां करते हैं।

किसी खास अवसर पर ही महिलाएं बाल खोलती थीं, अधिकतर उन्हें बांध कर रखा जाता था क्योंकि खुले बाल शोक की निशानी माने जाते थे।

आज भी हिंदू धर्म में कोई भी शुभ काम होने जा रहा हो तो महिलाएं अपने बाल व्यवस्थित रूप से बांध कर रखती हैंं।

मंदिर में भी खुले बाल रखना अशुभ माना जाता है।

जो लड़कियां फैशन की आड़ में बालों को खुला रखती है उन पर नकारात्मक शक्तियां अपना प्रभाव शीघ्र डालती हैं।

खासतौर पर जब चन्द्रमा की कलाएं घटती हैं, उस दौरान मन अत्यधिक भावुक होता है तो ऊपरी बाधाएं आसानी से अपना बसेरा बना लेती हैं।

रात को बिस्तर पर लेटते ही बहुत सी महिलाओं की आदत होती है बंधे बालों को खोल देती हैं।

फिर सोती हैं। पुराणों के अनुसार इससे व्यक्तित्व पर द्वेषपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

निगेटिव ऊर्जा सक्रिय हो जाती है। अत: प्रतिदिन सोने से पूर्व बालों को बांध लें।

रामायण में बताया गया है, जब देवी सीता का श्रीराम से विवाह होने वाला था, उस समय उनकी माता सुनयना ने उनके बाल बांधते हुए उनसे कहा था, विवाह उपरांत सदा अपने केश बांध कर रखना।

बंधे बाल बंधन में रहना सिखाते हैं।

केवल एकांत में अपने पति के लिए इन्हें खोलना।

जब रावण देवी सीता का हरण करता है तो उन्हें केशों से पकड़ कर अपने पुष्पक विमान में पटकता है।

अत: उसका और उसके वंश का नाश हो गया।

महाभारत युद्ध से पूर्व कौरवों ने द्रौपदी के बालों पर हाथ डाला था, उनका कोई भी अंश जीवित न रहा।

कंस ने देवकी की आठवीं संतान को जब बालों से पटक कर मारना चाहा तो वह उसके हाथों से निकल कर महामाया के रूप में अवतरित हुई।

कंस ने भी अबला के बालों पर हाथ डाला तो उसके भी संपूर्ण राज-कुल का नाश हो गया।