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Saturday, 19 November 2016

वजूद ए हिंदुस्तान पर शेर

वजूद-ऐ-हिन्द ना मिटा है, ना मिटेगा, मिटाने से..
कर रहा कोशिशें ज़माना, एक ज़माने से..
जुनूँ में आया था सिकंदर भी जीतने को इसे,
इसी जमीं ने पहुँचाया उसकी ख़ाक को ठिकाने से..

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